Simplified instructional computer ( SIC ) IN HINDI , SIC हिंदी में RISK AND CISK IN HINDI

Simplified instructional computer in hindi , SIC IN HIDNI,Memory Register , Data formats , Instruction format , Addressing mode , instruction set , Input / Output

Simplified instructional computer ( SIC ) IN HINDI , SIC standard model हिंदी में Memory Register , Data formats , Instruction format , Addressing mode , instruction set , Input / Output

  1. System Software क्या है
  2. System software और Machine Architecture को expalin कीजिये
  3. SIC क्या है ?
  4. SIC कितने प्रकार के होते है ?
  5. SIC standard model machine architecture क्या है ?
  6. Machine structure हैं ?
  7. Traditional (CISK) Machines (in hindi) को explain कीजिये
  8. RISK machine (in hindi) को explain कीजिये

System Software ⇒

System software कई प्रकार के प्रोग्राम से मिलकर बना होता है जो की कंप्यूटर के विभिन्न प्रकार के operation करता है
जैसे ⇒ Text editor, Compiler, Loader या Linker, Debugger, Assembler, Marco processor, Operating system , आदि

System software और Machine Architecture ⇒

  • क्या आप जानते है कि वह एक विशेषता (characteristic) है जो system software को Application Software से अलग बनाती है यदि नहि तो वो है machine dependency .
  • System software को इसलिये बनाया गया है ताकि वह विभिन्न प्रकार के operation में support कर सके और कंप्यूटर का उसे खुद कर सके , बजाय किसी particular application के | इसी कारण , ये जिस मशीन में run हो रहे होते है उस machine के architecture से आमतौर पर releted होते है |
  • आइये सिस्टम सॉफ्टवेर से सम्बंधित पोस्ट के लिए कुछ जानकरी दे दे ⇒ क्योकि ज्यादातर system software machine-dependent होते है , इसलिए हमें real machine और software के real piece को अपने study में शामिल करना चाहिए | हम प्रत्येक सॉफ्टवेर के piece(हिस्से) को simplified instruction computer (sic) -( एक काल्पनिक(hypothetical) कंप्यूटर ) के आधार पर fundamental functions को present करेंगे |

SIC standard model के componants / architecture को explain कीजिये

  1. Memory
  2. Register
  3. Data formats
  4. Instruction format
  5. Addressing mode
  6. instruction set
  7. Input / Output

SIC : Simplified instructional Computer SIC एक प्रकार का Hypothetical computer है | इसमें हार्डवेयर विशेषताएं हैं जो अक्सर वास्तविक मशीनों में पाई जाती हैं। जिसका प्रयोग computer system की internal Architecture या microprocessor functionality को explain करने के लिए किया जाता है | SIC के लिए ऑब्जेक्ट प्रोग्राम को SIX / XE पर ठीक से क्रियान्वित किया जा सकता है, जिसे अपवर्ड कंपेटिबिलिटी के रूप में जाना जाता है।

SIC के दो प्रकार होते है :

  1. SIC standard model
  2. SIC/XE (Extra equipment or extra expensive)

SIC standard model machine architecture :-

SIC एक प्रकार का hypothetical computer है | जिसमे 215 Byts memory files registers , 24 bit data format etc support होते है | SIC के निम्न componant होते है |

  1. Memory:

    SIC में 215 Byts = 32768 byts computer में support होती है |

    जिसमे किसी word को तीन conscetive Byte , 24 bits के रूप में define किया जाता है |

    मेमोरी बाइट एड्रेसेबल (एक मेमोरी यूनिट से relating या उसे denoting करना जिसमें सभी locations को एक particular program द्वारा अलग से एक्सेस किया जा सकता है। ) है जो कि शब्द उनके सबसे कम संख्या वाले बाइट के location से addressed किए जाते हैं।

  2. Registers:

    SIC में 5 Registers होते है | जिनमे प्रत्येक का special use किया जाता है |

    प्रत्येक Register की length 24 bit की होती है |

    हर रजिस्टर में इससे जुड़ा एक पता होता है जिसे रजिस्टर नंबर के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक रजिस्टर का आकार 4 बाइट्स होता है । रजिस्टर आकार के आधार पर, integer साइज़ पर निर्भर है।

    Mnemonic Number Special use
    A 0 Accumulator; used for arithmetic operations
    X 1 Index register; used for addressing
    L 2 Linkage register; the jump to Subroutine(JSUB) instruction stores the return address in this register
    PC 8 Program counter; contains the address of the next instruction to be fetched for execution
    SW 9 Status word; Contains a variety of information , including a Condition Code(CC)

    Status word रजिस्टर :

    mode state id cc mask x Icode
    1. मोड बिट उपयोगकर्ता (user) मोड (value = 0) या supervising मोड (value = 1) को संदर्भित(refer) करता है। यह 1 बिट occupy करता है। [0]
    2. State बिट से तात्पर्य है कि क्या प्रक्रिया चल रही स्थिति में है (मान = 0) या निष्क्रिय अवस्था में (मान = 1)। यह भी 1 बिट occupy कर लेता है। [1]
    3. आईडी बिट प्रोसेस आईडी (पीआईडी) को संदर्भित (refer) करता है। यह 3 बिट्स (occupy) कर लेता है। [2-5]
    4. CC bit, कंडीशन कोड को संदर्भित करता है यानी यह बताता है कि डिवाइस तैयार है या नहीं। यह 2 बिट्स (occupy) कर लेता है। [6-7]
    5. मास्क बिट का तात्पर्य interrupt mask से है। यह 4 बिट्स (occupy) कर लेता है। [8-11]
    6. एक्स unused बिट को संदर्भित करता है। यह 4 बिट्स (occupy) करता है। [12-15]
    7. ICode का तात्पर्य interrupt code से है जैसे interrupt service routine | यह शेष बिटों को occupy लेता है। [16-23]
  3. Data Format:-

    SIC में Integers को 24bit Binary Number के रूप में store किया जाता है | तथा Negative Value को 2's complement में represent किया जाता है |

    SIC में Character 8bit ASCII Code के रूप में store किया जाता है | SIC shorting Point Value को support नही करता है |

    \

    SIC के standard virsion पर floating-point hardware नही होता है

  4. Instruction format:-

    SIC में प्रत्येक instruction को 24bit format में store जाता है |

    8 1 15
    opcode x Address
    Flag bit x का प्रयोग indexed addressing mode को indicate करने के लिए किया जाता है .
    यदि x=0 इसका मतलब होता है - Direct addressing mode
    यदि x=1 इसका मतलब होता है - Indexed addressing mode
  5. Addressing Mode:-

    SIC में निम्न दो प्रकार के Addressing mode use किये जाते है |

    • Instruction में x बिट की setting द्वारा इंगित किया जाता है

    Mode Indication Target address calculation
    Direct x=0 TA=address
    Indexed x=1 TA=address + (X)

    (): register या मेमोरी लोकेशन का contents

  6. Instruction Set:-

    SIC में कई प्रकार के Instruction use होते है जो निम्न है
    1. SIC instructions के basic set देता है , जो की simple task के लिए sufficient (पर्याप्त) है |
    2. load और store instructions:

      Accumulator से memory या मेमोरी से accumulator में डेटा को move करने या स्टोर करने के लिए किया जाता है
      LDA, LDX, STA, STX, आदि .

    3. Arithmetic Instructions:

      Accumulator और memory में ऑपरेशन perform करने के लिए तथा उन्हें फिर accumulator में स्टोर करने के लिए किया जाता है |


      ADD, SUB, MUL, DIV, आदि .
    4. comparison instructions :

      Accumulator में कंटेंट के द्वारा मेमोरी में डाटा की तुलना के लिए इसका प्रयोग किया जाता है |

    5. conditional jump instructions:

      Accumulator और मेमोरी के content को compare करने तथा condition के आधार पर task को perform करता है |

      JLT, JEQ, JGT
    6. subroutine linkage:

      Subroutine से सबंधित निर्देश
      JSUB, RSUB

  7. Input और Output:-

    यह एक बार में 1 बाइट को स्थानांतरित (transfer) करके या संचायक (accumulator) के 8 बिट्स को दाईं ओर स्थानांतरित करके किया जाता है। प्रत्येक डिवाइस में 8 बिट यूनिक कोड होता है।
    या
    इनपुट और आउटपुट रजिस्टर A के rightmost 8 बिट्स से / के लिए एक बार में 1 बाइट को स्थानांतरित करके किया जाता है ,
      तीन प्रकार के I/O instructions:-
    1. Test Device (TD)

      डिवाइस (टीडी) टेस्ट करता है कि डिवाइस तैयार है या नहीं। स्टेटस वर्ड रजिस्टर में कंडीशन कोड का इस्तेमाल इस काम के लिए किया जाता है। यदि cc < है तो डिवाइस तैयार है अन्यथा डिवाइस व्यस्त है।

      यह पता लगाने के लिए कि क्या addressed डिवाइस डेटा भेजने या प्राप्त करने के लिए तैयार है

      Condition code को सेट किया गया है result को इंगित करने के लिए( <: ready,=: not ready)

    2. Read Data (RD) Device से byte को पढता है और उसे रजिस्टर में stores करता है
    3. Write Data (WD) : रजिस्टर A से byte को डिवाइस में writes करता है
  1. Traditional (CISC) Machines : CISC : Complex Instruction Set Computers
    1. इस section में describe की machines को CISC के रूप में classified किया गया है
    2. CISC मशीनों में आम तौर पर एक अपेक्षाकृत (relatively) बड़ा और जटिल (complicated) instruction सेट , कई अलग - अलग instruction format और lengths , और कई अलग अलग addressing mode होते है
    3. Hardware में ऐसे architecture का implementation complex (जटिल ) हो जाता है |
  2. RISC Machines : RISK : Reduced Instruction Set Computers
    1. RISK concept को 1980 के दशक की शुरुआत में, develop किया गया था , जिसका मकसद (लक्ष्य या इरादा )(intend) processors के डिजाईन को आसान बनाना था|
    2. इस simplified(सरलीकृत) design के परिणामस्वरुप तेज और कम खर्चीले प्रोसेसर का विकास , अधिक विश्वसनीय( reliability) और instruction के execution time को तेज किया जा सकता है
    3. सामान्य तौर पर, एक RISK system में standard , निश्चित instruction length ( वैसे एक machine word के equal(बराबर)), और single-cycle (एकल-चक्र) execution की विशेषता होती है ।

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