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waterfall model in hindi , software development life cycle models,

वाटरफॉल मॉडल क्या है और कैसे काम करता है?

वाटरफॉल मॉडल एक झरने  की तरह काम करता है| अभी मै ये आपको  ग्राफ में 

बताऊंगा
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 तो उसमें क्या होता है कोई भी क्लाइंट आपके पास आता है, और बोलता है

मेरे को सॉफ्टवेयर बनाना है | तो उसके लिए आप क्या करोगे पहले उस के क्या-क्या

रिक्वायरमेंट है| वह उससे ले लेंगे बाद में रिक्वायरमेंट एनालिसिस करोगे डायरेक्ट

सॉफ्टवेयर बनाने नहीं बैठ जाओगे, तो पहला Requirement एनालिसिस करोगे  और

फिर  रिक्वायरमेंट एनालिसिस खत्म होने के बाद, आप सिस्टम डिजाइन पर आओगे

मतलब सिस्टम को कैसे डिजाइन करना है, वह आपको पता चलेगा उसके बाद

इम्प्लीमेंटेशन  कैसे करना है टेस्टिंग कैसे करना है और डिप्लॉयमेंट कैसे करना है वह

पता चलेगा और Deployment  के बाद आपको सॉफ्टवेयर क्लाइंट को बताना होगा

और बाद में वह जो जैसा बोलते हैं वैसा उसको मेंटेनेंस करना पड़ेगा  |ये main

waterfall Model है | अभी वाटरफॉल मॉडल में स्पेशलिटी क्या है तो Requirement

एनालिसिस से आप सिस्टम डिजाइन पर आ गए तो सिस्टम डिजाइन से आप

रिक्वायरमेंट एनालिसिस पर नहीं जा सकते हो यह इसमें स्पेशलिटी है, इसीलिए हम

बोलते हैं कि यह झरने की तरह काम करता है |एक बार आप नीचे के फेस पर आ गए

तो ऊपर के फेस पर नहीं जा सकते हो एक बार यहां से नीचे आ गया तो आप ऊपर

नहीं जा सकते हो| ये main स्पेशलिटी है| waterfall Model मॉडल में क्या होता है कि

Human  हंड्रेड परसेंट फिक्स नहीं होता है कि यही हमको रिक्वायरमेंट है अगर उसको

कोई भी नहीं इंप्लीमेंटेशन करना है अगर आप उसकी कोई भी रिक्वायरमेंट चेंज हो गए

सिस्टम डिजाइन के बाद तो हम तो परफेक्ट है तो उसमें क्या करना पड़ेगा हमको

रिक्वायरमेंट एनालिसिस पर जाना पड़ेगा सिस्टम डिजाइन से ठीक है तो वाटरफॉल

मॉडल क्या प्रोवाइड करता है कि आप अगर सिस्टम डिजाइन पर हो तो रिक्वायरमेंट

एनालिसिस पर जा सकते हो लेकिन अगर आप इंप्लीमेंटेशन पर हो तो सिस्टम

रिक्वायरमेंट एनालिसिस में नहीं जा सकते यह मुख्य desadvantage  है |
स्पेशलिटी बोलो तो भी सही है|  मतलब आप पहले फेस पर हो तो दूसरे फेस पर जाओ

और दूसरे सबसे पहले पेज पर आ सकते हो पर अगर आप तीसरे भेजते हो तो पहले

पेज पर नहीं आ सकता हो ये Subsequent  जैसा होना चाहिए| तो अब तक आपको

waterfall model   का जो मेन कंसेप्ट को पता चल गया होगा

 अभी इसमें प्रश्न कैसे बनते है वो देख लेते है ?

1)When water fall model use ?(वाटरफॉल मॉडल का प्रयोग कब किया जाता है ?
 तो वह  वाटरफॉल मॉडल का   यूज़ तभी  होता है जब प्रोजेक्ट छोटे है तब use

होता है | मतलब अगर आपका प्रोजेक्ट बहुत बड़ा हुआ तो रिक्वायरमेंट एनालिसिस में

कोई भी सुधार आएगा ही आएगा क्योंकि आपका प्रोजेक्ट बड़ा है इसलिए वाटरफॉल

मॉडल वहां पर फेल हो जाता है ठीक है
2)What is specialty of WaterFall model (वॉटरफॉल मॉडल की स्पेशिलिटी क्या है 

?)
स्पेशलिटी ऑफ वाटरफॉल मॉडल स्पेशलिटी क्या है तो यह है कि अगर आप

रिक्वायरमेंट एनालिसिस से सिस्टम डिजाइन पर आएं तो सिस्टम डिजाइन से

रिक्वायरमेंट एनालिसिस पर नहीं आ सकते हो यह मैंन स्पेशलिटी है पर कई बार उस

में आना ही पड़ता है जैसे गवर्नमेंट रूल चेंज हो गए,या अगर फेसबुक   काम ले रहे हो

 तो वह भी  ऑडियो कॉलिंग है और वह बोलता है कि अभी मेरे को वीडियो कॉलिंग

भी करना है तो वह रिक्वायरमेंट एनालिसिस पर हम को आना ही पड़ेगा बाद में

सिस्टम डिजाइन में चेंजेस हो गए यह इसका उदाहरण  है

Waterfall model के प्रॉब्लम :


1)Specification is frozen early,because It is costly and time consuming
मतलब क्लाइंट का स्पेसिफिकेशन जो दिया होता है वो चेंज हो जाता है क्योकि उसको

चेंज करना पड़ता है अगर सोफ्टवेयर में तो concept चेंज हो जाता है | इसीलिए

हमको वापस जाना पड़ता है | तो उसमे क्या होता है की टाइम consuming हो जाता

है ,पूरा सॉफ्टवेयर का कोडिंग हमको देखना पड़ता है पूरे इंप्लीमेंटेशन देखना पड़ता है

यह मुख्य प्रॉब्लम है
2)Specification is frozen early,because Less possibity to get success
इसमें क्या होता है की क्लाइंट  कई बार आता है और चेंजेस देता है और हम को

करना पड़ता है अगर हम परफेक्ट है  तो भी  हम उसमें कुछ नहीं कर सकते तो यह

सक्सेस बहुत  नहीं है | इसीलिए ये स्मॉल प्रोजेक्ट में यूज होता है|

Waterfall Model के  Observations: 

1)Process stages can be iterative.
मतलब क्लाइंट बोलता है की हम को ये चेंजेस करना है तो हमारी प्रोसेस Iterative

method  में change हो जाती है
मतलब हमको रिक्वायरमेंट एनालिसिस सिस्टम डिजाइन पर गए थे फिर से

रिक्वायरमेंट एनालिसिस पर आ गये इसे Iterative method पर काम करना पड़ता है

2)Flexibility in coping with changing specification.
स्पेसिफिकेशन चेंज होने से हमको फ्लेक्सिबिलिटी करनी पड़ती है मतलब एक प्रोसेस से

दूसरी प्रोसेस में जाना पड़ता है तो आपको  पता चल गया होगा कि वाटरफॉल मॉडल

एक्चुअल है क्या और उसका concept क्या है

तो आइये सॉर्ट में फिर से रिवाइज कर ले =>
वाटरफॉल मॉडल झरने की तरह काम करता है उसमें एक प्रोसेस से दूसरी प्रोसेस पर

आए तो दूसरी प्रोसेस से पहले प्रोसेस पर जाना नहीं पड़ता ये इसका मुख्य concept है
| और वाटरफॉल मॉडल में ह्यूमन बिहेवियर 99% होता है सो अगर क्लाइंट की

रिक्वायरमेंट हुए तो हम को वापस जाना पड़ता है|
पर वो subsequent दो stages में ही जाना पड़ता है  मतलब अगर आप दुसरे stage

में आये तो पहले स्टेज पर  आ सकते हो| पर तीसरे से पहले स्टेज पर नहीं आ सकते

हो|
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